तरबूज की खेती कैसे होती है || Water Melon Farming

 

नमस्कार दोस्तों,  आज हम आपको बताने वाले है, की तरबूज की खेती कैसे होती है,  कहा मुख्य रुप से किया जाता है? और आप इसे कैसे कर सकते है?,  कितना मुनाफा है इसमें? 

तमाम तरह की बाते जो तरबूज की खेती से जुडी है, हम आपको आज बताएँगे !

तरबूज की खेती मे सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण बात यह है को इसकी खेती हर मिट्टी पर नहीं की जा सकती !
इसके लिए सिर्फ बलुअस (बालूनुमा) मिट्टी मे ही इसकी खेती हो सकती है वो भी किसी नदी किनारे या नदी की सूखे हुए भाग मे !
निचे के तस्वीर मे देखिए इसी तरह की मिट्टी की आवश्यकता पडती है :-

इस तस्वीर मे जो आप देख रहे है बलुअस मिट्टी इसी तरह की मिट्टी की आवश्यकता पड़ती है, इस तस्वीर मे बालू का रंग काभी हद तक उजला है यह सबसे उपयुक्त मानी जाती है तरबूज, ककड़ी, खीरा, खरबूजा, लालमी जैसे फलो के लिए, 
कही-कही इस बलुअस मिट्टी का रंग हल्का लाल होता है !
तरबूज की खेती खासकर बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों मे अधिक होता है !
सबसे पहले इस तरबूज की खेती के लिए ऐसे नदी के किनारो का चयन किया जाता है जहाँ की जमीन बलुअस भी हो और पानी भी भरपूर मात्रा मे मिले !
तरबूज की खेती के लिए सबसे पहले कुदाल से एक निश्चित दूरी पर थोड़ा-थोड़ा जमीन को कोड़ा (गड्डा) किया जाता है ताकि जमीन के अंदर भरपूर मात्रा मे ऑक्सीजन का स्तर बना रहे, फिर 10 फुट के अंतराल पर खोदे गए छोटे-छोटे गड्ढो मे चार-चार बीज डाले जाते है और उसे ढक दिया जाता है !
आपको जानकर शायद हैरानी हो तरबूज की बिजे 15,000-45,000 रूपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से मिलता है, क्यू ताज्जुब हुआ न -
बिजे के गुणवत्ता के हिसाब से मूल्य मे वृद्धि आगे पीछे होती है, 
तकरीबन 7 दिन बाद बीज से अंकुरित छोटे तरबूज के पौधे निकल रेत से ऊपर आ जाती है, 
फिर उन पौधे के आस-पास थोड़ा सोहनी की जाती है !
बीज मे अंकुरित होने से पहले ही 50-50 फिट के अंतराल पर सीधा एक खड़ (लंबे घास) की पतली दिवार जैसे बना दिया जाता है, ताकि किनारो पर हवा तेज होती है और हवा से रेत मे बहाव उत्पन्न हो जाता है और ये खड़नुमा दिवार उन रेत को रोक लेती और पौधे को नुकसान से बचाती है यही नहीं ये खड़ तेज हवाओ की गति पर भी रोक लगाती है जिसे पौधे ठण्डी हवा से सुरक्षित रहती है !
ज़ब बीज से अंकुर को निकले हुए 15 दिन हो जाते है तब इन पौधों से एक से डेढ़ फुट की दूरी पर चौकोर गड्डा खोदा जाता है बिना पौधे को नुकसान किए हुए !
जैसे इस निचे के तस्वीर मे आप देख रहे है :-
इस गड्ढे को तब तक खोदा जाता है ज़ब तक पानी न मिल जाये, ऐसे जगह पर तकरीबन 4 फुट गड्डा खोदना पढ़ता है !
फिर इसमें कंपोस्ट खाद और कुछ यूरिया, DAP खाद डालकर समतल कर दिया जाता है, 
कमपोस्ट खाद की बात करे तो इसमें मुर्गो के मल का इस्तेमाल किया जाता है, क्यू की इसमें ज्यादा गर्मी और किसी भी कमपोस्ट के मुकाबले ज्यादा मिनीरेलस उपलब्ध होता है जो की तरबूज की खेती के लिए सबसे ज्यादा जरुरी होती है !
इसके उपरांत इसमें अब कुछ ज्यादा तो नहीं फिर भी बहुत मेहनत बाकि है करने के लिए !
अब सिर्फ तरबूज के पौधों के अगल बगल खर-पतवार को उपजने से रोकना होता है और सुबह-शाम प्रति पौधा 10-15 लीटर पानी दिया जाता है, 
1 महीने के बाद पौधे लताओं मे बदल जाती है और रेत पर सैर के लिए निकल पड़ते है /
अब उन खड़ के दीवारों को मोड़कर पौधों के आस-पास बिखेर दिया जाता है ताकि पौधे उस खड़ को अपनी पकड़ के रुप मे इस्तेमाल कर सके !

अभी भी मुख्य काम दिन मे पानी देना, 10 दिन पर कमपोस्ट खाद देना और एक अतिरिक्त काम यह बढ़ जाता है की पौधे जैसे-जैसे बड़े होंगे उनमे कीड़े लगने का डर बनता है इसके लिए कुछ रासायनिक किट नाशको का प्रयोग किया जाता है !
नदी मे पानी का स्तर संतुलित मात्रा मे बना रहे तो तरबूज की पहली खेप तकरीबन 120 दिन पर निकलना शुरू हो जाती है !
अब बात करते है खर्च की तो साथियों यह व्यवसाय या खेती बहुत ही महँगा माना जाता है और वाकई मे यह सच है, 

प्रति पौधे के हिसाब से जमीन का रेत लगता है, 
अनुमानित अगर सब कुछ ठीक रहा तो एक तरबूज के पौधे औसत 20-50  तरबूज दे सकते है और इनका एक तरबूज का औसत वजन 5-10 किलो तक हो सकता है, 
और एक तरबूज पर तकरीबन खर्च 5-10 रूपये तक जा सकती है अगर सब कुछ ठीक रहा तो अन्यथा लागत 15-20/तरबूज हो सकती है, 

थोक भाव मे एक तरबूज 15-20 रूपये मे बिक जाती है, 
यानी कुल मिलाकर हम कह सकते है अगर आपकी किस्मत साथ रही और नदी का स्तर  जल्द न बढ़ा तो आप मालामाल हो जायेंगे और किस्मत साथ न दी तो आप रोड छाप हो सकते है, 
वैसे हम बात करे लागत की तो 1000 फुट स्क्वायर पर तक़रीबन 1-1.5 लाख रूपये लग जाते है....... 
तो अगर आप है दम रिस्क लेने की तो यह व्यवसाय आप के लिए है, बाकि कुछ जानकारी के लिए हमें कमेंट करे, हमारे युटुब चैनल Royal busines पर जाकर सारी बाते समझ और देख सकते है /
 
धन्यवाद साथियों, 
अगर कुछ सवाल हो तो आप हमसे कमेंट के जरिये पूछ सकते है, 
फिर मिलते जल्द ही कोई और बिजनेस आईडिया के साथ 
नमस्कार !!

Team Royal Yatra 
(लेखन-गौतम राज़)

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