बिम्बिसार कारावास, राजगीर




 भारत का इतिहास जितना गौरवमयी है उतना ही पुराना है।
 यहां अनेकों प्रतापी राजा हुए हैं जिन्होंने इस गौरव में भूमि पर राज किया, किंतु कुछ ऐसे राजा भी हुए हैं जिनका नाम दुर्भाग्य राजाओं में गिना जाता है, सत्ता की होड़ में अपने द्वारा ही उनका शोषण या उन्हें मृत्यु के घाट तक पहुंचा दिया गया है।
 ऐसी है कहानियां है आज से ढाई हजार वर्ष पुराना

बिम्बिसार का कारावास :-

 बिंबिसार का कारावास राजगीर में स्थित है, यहीं पर राजा बिंबिसार ने कई वर्षों तक गौरव में शासन काल चलाया था, किंतु सत्ता के लोग में आ जाने से उनके बेटे यानी अजातशत्रु ने उन्हें बंदी बना लिया था।
 हालांकि इतिहास के पन्नों में यहां दर्ज है कि भगवान बुद्ध के चचेरे भाई यानी देवदत्त के द्वारा उसकाये जाने पर ही बिंबिसार के बेटे यानी अजातशत्रु ने अपने पिता को कारावास में डाल दिया और राज्य पाठ अपने अधीन ले लिया।
 अनेकों षड्यंत्र किए गए विशाल को मारने के लिए किंतु अजातशत्रु इसके लिए तैयार नहीं हुआ।
 एक रोचक कहानी यह भी है कि जब बिंबिसार कुछ कारावास में डालने की बात आए तो दिल भी साथ लेकर ने मांग रखी आजाद शत्रु के सामने की उसे ऐसे कारावास का स्थान चयन करने दिया जाए जहां से भगवान बुद्ध का दर्शन हो सके  और ऐसे स्थान पर जेल का निर्माण किया जहां से बुध दिखाई देते थे।
 समय के बाद फिर से देवदत्त के कहने पर ही अजातशत्रु एक लोहे की छड़ी लेकर जेल की तरफ गया, यहां सूचना पाकर बिंबिसार ने आत्महत्या कर ली, ताकि पुत्र के द्वारा अपमानजनक मृत्यु से प्राप्त  न हो सके।
पर्वत क़े चोटी पर भगवान बुद्ध अपने शिष्यों को उपदेश दिया करते थे, उस छोटी को गिर्द का गुहा कहा जाता है।

 मौजूदा समय में यह जेल खत्म हो चुका हैैैैैैैैैैैैैैैैै  सिर्फ इसके नियम ही दिखाई देती है। यह जेल सिर्फ एक इंसान के लिए बनाया गया था।
 जेल इसी के पास मौजूद पर्वतों से काट के बनाया गया था।
 नीचे उस जेल की कुछ तस्वीर है



धन्यवाद
(लेखन -गौतम राज़) 

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